यह किसानों के जीवन-मरण का प्रश्न हैं और हम किसानों से उनकी ज़मीन मरते दम तक नही छिनने देंगे – जयंत चौधरी

0
Jayant Chaudhary

सीकर 10 अप्रैल : जयंत चौधरी ने आज राजस्थान के पालडी गाँव ज़िला सीकर में किसान पंचायत को संबंधित किया। सबसे पहले उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी चौधरी रुडाराम मील जी की प्रतिमा का अनावरण किया। पंचायत को संबोधित करते हुए उन्होंने युवाओं से अपील की कि पहले जो परिवर्तन एक सदी में होते थे आज चार-पाँच सालों में हो जाते हैं पर हमें उन आदर्शों और मूल्यों का पालन करना हैं जो हमारे स्वतंत्रता सेनानी महापुरुष हमारे लिए छोड कर गए हैं।

किसान आंदोलन पर बोलते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि आज किसान आंदोलन को 135 दिन हो गए हैं। किसान सीधा-साधा हैं पर सरकार यह ना भूले कि किसान के आगे बड़े-बड़े साम्राज्य ढह गए हैं। किसान आंदोलन को बड़े रूप में समझाते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि यह आंदोलन अपने कई अर्थों में बहुत व्यापक हैं क्यूँकि जो फ़ासले हमारे बीच खड़े कर दिए गए थे यह आंदोलन आज उन सब फ़ासलों को मिटा रहा हैं और पूरे देश का किसान चाहे वो किसी भी जाति-धर्म को मानता हो एक साथ आ रहा हैं। और जो सपना किसानों को लेकर चौधरी चरण सिंह, कुम्भा राम आर्य जी,दौलत राम सारण जी ने देखा था आज वो पूरा होता दिखाई दे रहा हैं।

पिछले साल लगाए गए लाकडाउन का हवाला देते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि जब सब धंधे फैल हो गए थे तब एक मात्र खेती ही ऐसा धंधा था जिसने लोगों को रोज़गार भी दिया और देश को भूखा भी नही मरने दिया। प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि ये इतने असंवेदनशील हैं कि 300 से ज़्यादा किसानों की शहादत के बाद भी एक शब्द भी उनके लिए नही निकला। इस सरकार का एक भी फ़ैसला ऐसा नही रहा जिसने देश को सम्भाला हो बल्कि चाहे वो नोट बंदी हो, ग़लत GST का लगाया जाना हो या पिछले साल का बिना किसी से बातचीत किए अचानक लाकडाउन लगाना, इन सब फ़ैसलों ने देश को सिर्फ़ आर्थिक तौर पर तो बर्बाद किया ही इसके साथ-साथ लाखो लोगों का रोज़गार भी छिन लिया।

आज पढ़े-लिखे नौजवान की भरमार हैं। जहां सरकार का काम उनको उचित कार्य कैसे दिए जाए इस पर केंद्रित होना चाहिए थे, वो आज सिर्फ़ धर्म और जाति में इन नौजवानों को बाँट रहे हैं। किसान की आमदनी को दोगुनी करने का ऐलान करने के बाद उस दिशा में कोई सार्थक पहल आज तक सरकार ने नही दिखाई और अब ये नए कृषि क़ानूनों के द्वारा किसानों से उनकी भूमि छिन कर भूमिहीन मज़दूर बनाने पर तले हुए हैं। यह किसानों के जीवन-मरण का प्रश्न हैं और हम किसानों से उनकी ज़मीन मरते दम तक नही छिनने देंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here