लोकतंत्र का हत्यारा साबित होगा संपत्ति क्षति वसूली कानून – दीपेंद्र हुड्डा

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दीपेंद्र सिंह हुड्डा क्या बोले संपत्ति क्षति वसूली कानून पर

चंडीगढ़, 19 मार्च। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा सरकार द्वारा विधानसभा में पारित ‘संपत्ति क्षति वसूली विधेयक-2021’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘संपत्ति क्षति वसूली कानून’ लोकतंत्र का हत्यारा कानून साबित होगा। इसके जरिये सरकार की मंशा सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने और आम आदमी को भयभीत करने की है। उन्होंने मांग करी कि ये असंवैधानिक कानून तुरंत वापिस हो। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण धरने व प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।

उन्होंने तंज कसा कि ये वही सरकार है जो खुद सड़कें खुदवा कर, अपने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण धरनों पर पथराव करवाके देश की संपत्ति का नुकसान क़रती है। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सारे देश का पेट भरने वाला किसान और सीमा पर छाती तानकर देश की रक्षा करने वाला जवान देश की बहुमूल्य संपत्ति हैं। किसान आंदोलन में 300 से ज्यादा किसानों की जान चली गयी, जिसके लिये पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार है। सरकार बताए कि इसकी भरपाई कौन करेगा?

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि किसान आंदोलन से डरी सरकार नये-नये हथकंडे अपनाकर किसानों को डराना चाहती है। संपत्ति क्षति वसूली कानून बनाने वाली सरकार सबसे पहले सड़क खोदने वाली हरियाणा सरकार पर कार्रवाई करे और जो लोग इसके लिये जिम्मेदार हैं उनके निजी कोष से नुकसान की भरपाई की जाए। भाजपा के लोग ये न समझें कि हमेंशा सत्ता रहेगी, वक्त बदलते वक्त नहीं लगता। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अपने हकों के लिए संघर्ष और प्रजातांत्रिक तरीकों से विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

आमजन के लोकतांत्रिक अधिकार और असहमति की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। लेकिन देश की सबसे बड़ी किसान विरोधी हरियाणा सरकार ने प्रजातंत्र के दायरे में शांति के साथ अपनी बात कहने देश की राजधानी जा रहे किसानों को रोकने के लिए रास्तों में रोड़े अटकाये, बड़ी-बड़ी मशीनों से हाईवे खुदवाये, सड़कों पर मोटी-मोटी कीलें गाढ़ी और कड़ाके की ठंड में किसानों पर ठंडे पानी की बौछारें मारी, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोल दागे। हरियाणा की गठबंधन सरकार बताए क्या सड़कों को खोदकर बड़ी-बड़ी खाई बनाना संपत्ति के नुकसान के दायरे में नहीं आता।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में सरकार ने सारे कायदों को ताक पर रखकर जबरन इस विधेयक को पास कराया है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक और लोकतंत्रविरोधी है। उन्होंने बताया कि विधेयक के अनुसार आंदोलनों, प्रदर्शनों के दौरान सरकारी व निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई केवल आंदोलनकारियों से ही नहीं, बल्कि आंदोलनकारियों का नेतृत्व करने वालें, आयोजन करने वालों, योजना बनाने वालों, प्रोत्साहित करने वालों से भी की जायेगी। इतना ही नहीं आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में अगर सरकार को अर्धसैनिक बल या अन्य राज्यों से फोर्स बुलानी पड़ी तो इसका खर्च भी आंदोलनकारियों से ही वसूला जाएगा।

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