अपनी पगड़ी बेच कर घी पी रही है हरियाणा सरकार-भूपेंद्र सिंह हुड्डा

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चंडीगढ़,  नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आंकड़ों के ज़रिए बीजेपी के वित्तीय कुशासन की पोल खोली। उन्होंने कहा है कि बीजेपी सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन ने प्रदेश को कर्ज़ में डुबो दिया है। आज हरियाणा में हर बच्चा सिर पर 80 हज़ार का कर्ज़ लेकर पैदा होता है। हमारी मांग है कि सरकार लगातार बढ़ रहे कर्ज़ पर श्वेत पत्र जारी करे और बताए कि उसने इतना रुपया कहां ख़र्च किया। उन्होंने कहा कि 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई थी तो उसने पिछली सरकारों के कर्ज़ पर ख़ूब हायतौबा मचाई थी। इतना ही नहीं बीजेपी से पहले की तमाम सरकारों ने जो 60,300 करोड़ का कर्ज़ लिया था, उसपर बीजेपी श्वेतपत्र लाई थी। जबकि हमारी सरकार के दौरान सैंकड़ों बड़े प्रोजेक्ट, मेट्रो, रेलवे लाइन, एम्स, आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल कॉलेज, पॉवर प्लांट्स, न्यूक्लियर प्लांट, सैंकड़ों बड़े उद्योग स्थापित हुए। लेकिन बीजेपी राज में ऐसा कोई संस्थान, निवेश या उद्योग हरियाणा में नहीं लगा। बावजूद इसके बीजेपी सरकार ने बेतहाशा कर्ज़ लिया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि साल 2013-14 तक GSDP के मुक़ाबले कर्ज़ का अनुपात महज़ 15.10 था। जो आज बढ़कर 21.14 हो गया है। हरियाणा की गिनती पहले समृद्ध राज्यों में होती थी, आज कर्जवान राज्यों में होती है। ज्यादा कर्जा लेने की वजह से लोन और उसके ब्याज की पेमेंट पर कुल सरकारी खर्च का अनुपात बढ़ता जा रहा है। साल 2016-17 में कुल खर्च का 18.51 प्रतिशत कर्ज लौटाने में जाता था, जो अब बढ़कर 28.61 प्रतिशत हो गया है। हालात ये है कि सरकार के पास पूंजीगत निवेश के लिए भी बजट नहीं है। पूंजी निवेश के लिए बजट में 10 प्रतिशत से भी कम का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्ज़ लो और घी पीयो की चार्वाक वाली नीति पर आगे बढ़ रही है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार को नसीहत दी कि पगड़ी गिरवी रखकर कर्ज़ नहीं लेना चाहिए। सरकार को वक़्त रहते लगातार बढ़ते रेवेन्यू डेफ़िसिट और फ़िस्कल डेफ़िसिट को कंट्रोल करना चाहिए। 2013-14 में जो फिस्कल डेफिसिट 2.07 फ़ीसदी था वो 2019-20 में बढ़कर 2.82 फ़ीसदी हो गया। इसी तरह जो रेवेन्यू डेफ़िसिट 2013-14 में महज़ 0.97 प्रतिशत था वो 2019-20 में 1.76 प्रतिशत हो गया। उन्होंने कहा कि पूरा देश आज मंदी की चपेट में है। हरियाणा की इंडस्ट्रियल ग्रोथ भी लगातार कम होती जा रही है। यही वजह है कि आज बेरोज़गारी 28 फ़ीसदी तक पहुंच गई है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने किसानों के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों और कुदरत की मार से किसान लगातार कर्ज़दार होता जा रहा है। ओलावृष्टि और बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान का सरकार जल्द से जल्द मुआवज़ा दे। सरकार को एकड़ नहीं, बल्कि नुकसान का आंकलन करके उसके समर्थन मूल्य के बराबर प्रति क्विंटल के हिसाब से मुआवज़ा देना चाहिए। क्योंकि किसानों की तैयार फसल बर्बाद हुई है। पिछले दिनों हुए नुक़सान की अबतक गिरदावरी नहीं हुई थी कि फिर 3 दिन की बारिश ने नुकसान को बढ़ा दिया। गेहूं, सरसों, चना और सब्ज़ियों की खेती को सौ फीसदी तक नुकसान झेलना पड़ा है। दूसरों के लिए अन्न उगाने वाला किसान आज ख़ुद दाने-दाने का मोहताज़ हो गया है। इसलिए सरकार को फौरन किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

अंतराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम पाताल में पहुंच चुके हैं लेकिन हमारे प्रदेश में अब भी दाम आसमान पर हैं। कांग्रेस सरकार में 8.9 प्रतिशत वैट की दर थी लेकिन अब 17.4 फीसदी दर कर दी गई है। इसके अलावा एक्साइज़ ड्यूटी से लेकर तमाम टैक्स जनता पर थोप दिए गए हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों को अगर देखा जाए तो तेल की कीमत 30 से 35 रुपये से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे किसानों को भी राहत मिलेगी और अर्थव्यवस्था को भी बूम मिलेगा।

 

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