चलो करके देखें

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ग्वालियर में रहने वाले योगेंद्र तोमर ने अभिनव प्रयोग किया है। घर मे मौजूद पॉलीथीन को एक पाइप पर लटका कर उसमे तिनके घास फूंस भर कर उसमे एक स्लिट बना कर पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए आमंत्रण दिया है। उम्मीद की है कि गौरैया इसमें घोंसला बनाएगी, अब बनाएगी या नही बनाएगी वो बाद में मालूम चलेगा लेकिन मुझे उनका यह चिंतन अवश्य पसंद आया क्योंकि उन्होंने पक्षियों की वेदना को समझा और उसे कम करने के लिए इनोवशन प्रोसेस को अपने अंदर चालू किया। इंटरनेट पर सैंकड़ों आइडियाज उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से पक्षियों के सुंदर आश्रय बनाये जा सकते हैं , आज नही तो कल योगेंद्र भाई जब अपने शोध का मूल्यांकन करेंगे तो पता चलेगा कि इस हाइपोथिसिस में कितना दम है तभी नए विचारों का समावेश करके एक स्थाई हल ढूंढा जा सकेगा। ऐसा नवोदित प्रयास हम सभी को अपने अपने घर मे अवश्य करना चाहिए और पक्षियों के लिए छोटे छोटे लकड़ी के आश्रय घर मे एक आध स्थान पर जरूर बनाने चाहियें। अलख परिवार के मित्र कमलजीत द्वारा ग्यारहवीं शोधयात्रा जो मुकामधाम बीकानेर से जिला रियासी जम्मू काश्मीर तक जून 2019 में कई गयी थी उसमें बिश्नोई समाज के साथ बेहद शानदार इंटरेक्शन हुआ था वहां से एक बात सीख कर आये थे ‘विष्णु विष्णु भण से प्राणी’ बकौल जाम्भों हे मनुष्य तू स्वर्ग नरक के चक्कर को छोड़ कर डायरेक्ट विष्णु बन जा और अपनी सृष्टि मतलब जहां भी तू है उसका पालन कर।

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